नमामि गंगे, गंगा में बसने वाले जीव संरक्षण का साझा अभियान : सी.आर.पाटिल
-गंगा डॉल्फ़िन, कछुओं और अन्य जलीय जीवों के माध्यम से नदी के स्वास्थ्य को समझाने की उनकी सरल भाषा, -गंगा से हमारे भावनात्मक और वैज्ञानिक रिश्ते को और मजबूत करती है
-जल ही जीवन है, और जीवन की रक्षा हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी
देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर.पाटिल उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान रिवर डॉल्फ़िन रेस्क्यू एम्बुलेंस का उद्घाटन किया गया तथा गंगा एवं अन्य नदियों के लिए एक्वा लाइफ कंज़र्वेशन मॉनिटरिंग सेंटर की शुरुआत की गई। इस अवसर पर इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया और डॉल्फ़िन संरक्षण रिपोर्ट तथा कछुआ संरक्षण परियोजना (फेज-1) से जुड़ी रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया।गंगा प्रहरी, शोधकर्ताओं और पानी की पारिस्थितिकी एवं संरक्षण में अध्ययनरत MSc पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों से संवाद किया गया।
केन्दीय जलशक्ति मंत्री सी.आर.पाटिल ने अपने संबोधन में कहा की, यह कार्यक्रम इस बात का सशक्त उदाहरण है कि नदी संरक्षण, जलीय जैव-विविधता और वैज्ञानिक शोध मिलकर कैसे हमारी नदियों के भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं। आज WII campus में आयोजित संवाद और यहाँ से जुड़े सभी अनुभव इस बात को स्पष्ट करते हैं कि नदियों को केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवनधारा के रूप में समझना और अपनाना होगा। नमामि गंगे केवल सफ़ाई का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नदी और उसमें बसने वाले प्रत्येक जीव के संरक्षण का साझा अभियान है।
श्री सी.आर.पाटिलजीने कहा की, गंगा प्रहरी, शोधकर्ता, संस्थान और स्थानीय समुदाय मिलकर यह सिद्ध कर रहे हैं कि विज्ञान, सतत निगरानी और जनभागीदारी जब एक दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो ठोस परिणाम सामने आते हैं। चाहे गंगा डॉल्फ़िन की बढ़ती संख्या हो, कछुओं का संरक्षण हो या समाज में नितदिन बढ़ती जागरूकता। जल ही जीवन है, और जीवन की रक्षा हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी। आज इस अभियान से जुड़े युवाओं, जल मित्रों और गंगा प्रहरियों को देखकर पूरा विश्वास है कि नदियों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। हम केवल प्रयास नहीं, बल्कि स्थायी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए संकल्पित हैं, ताकि नदियाँ स्वच्छ, अविरल और जीवनदायी बनी रहें।
श्री पाटिल ने आगे कहा की, आज ‘गंगा प्रहरियों’ से संवाद करते हुए यह और दृढ़ विश्वास हुआ कि गंगा का भविष्य केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर जुड़े लोगों के समर्पण से संभव है। गंगा प्रहरी, जो गंगा के साथ जीते आए हैं, आज उसी गंगा के संरक्षक, शिक्षक और संवाहक बनकर समाज को जोड़ रहे हैं। विद्यालयों से लेकर गांवों और शहरों तक जैव-विविधता, जलीय जीवों और गंगा के महत्व को समझाने का उनका प्रयास यह दिखाता है कि जनभागीदारी जब ज्ञान से जुड़ती है, तो संरक्षण एक जन-आंदोलन बन जाता है। गंगा डॉल्फ़िन, कछुओं और अन्य जलीय जीवों के माध्यम से नदी के स्वास्थ्य को समझाने की उनकी सरल भाषा, गंगा से हमारे भावनात्मक और वैज्ञानिक रिश्ते को और मजबूत करती है। नमामि गंगे के तहत गंगा प्रहरियों का यह समर्पण देश को यह संदेश देता है कि गंगा को अविरल-निर्मल रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है और इस प्रयास में सरकार, संस्थान और समाज कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं। आज उनसे संवाद करते हुए और माँ गंगा के प्रति उनके समर्पण को देखकर संतोष और आनंद की अनुभूति हुई।
श्री पाटिल ने कहा , प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में नमामि गंगे आज एक सशक्त जनआंदोलन के रूप में निरंतर प्रगति कर रहा है-जहाँ विज्ञान-आधारित समाधान, प्रभावी संरक्षण प्रयास और जनभागीदारी के समन्वय से गंगा की अविरलता, निर्मलता और समृद्ध जैव-विविधता को सुरक्षित एवं सुदृढ़ करने का संकल्प और अधिक दृढ़ हो रहा है।