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September 16, 2026

अमित शाह,सी आर पाटिल की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ परियोजना पर किए हस्ताक्षर

यह समझौता मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” और टीम भारत के मूल मंत्र का उत्तम उदाहरण

मोदी सरकार में यह दसवाँ जल विवाद आज समाप्त होने जा रहा

समझौते से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ये सभी राज्य लाभान्वित होंगे
2018 से 2026 तक का कालखंड मोदी जी के नेतृत्व में उत्तर भारत में आपसी सहमति से जल विवादों को समाप्त करने के कालखंड के रूप में जाना जाएगा
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता दिल्ली और यमुना दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा, इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है, इसका लगभग 90% वित्तीय भार भारत सरकार और शेष 10% राशि भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनेगा, जहाँ 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण होगा
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते से सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा
परियोजना के तहत 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल की उपस्थिति में आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी उपस्थित थे।

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक समझौते के साक्षी बने हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना पूरी होने के बाद यह घटना इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन जाएगी। उन्होंने कहा कि आज हुए समझौते से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली किसी-न-किसी रूप में लाभान्वित होंगे। श्री शाह ने कहा कि इसमें सबसे अच्छी बात है कि छह राज्यों ने अपनी सहमति दी और समझौते पर हस्ताक्षर किए। गृह मंत्री ने परियोजना को इस अंजाम तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए छहों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और यमुना बेसिन के इन छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने के लिए कटिबद्ध हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब से नरेन्द्र मोदी  प्रधानमंत्री बने हैं, आज यह दसवाँ जल विवाद समाप्त होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में बीते पचास वर्षों से चले आ रहे गंभीर विवादों को समाप्त करने का अभियान चला है । उन्होंने कहा कि सबसे पहले अगस्त 2018 में लखवार बहुउद्देशीय परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। उसी महीने शाहपुर कंडी बांध परियोजना का विवाद सुलझा। वर्ष 2019 में ऊपरी यमुना बेसिन की रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। वर्ष 2021 में केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ, जिससे बुंदेलखंड जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र को लाभ मिला। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल रिवर लिंक योजना वर्ष 2024 में आगे बढ़ी। हथिनीकुंड से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से यमुना तक जल अंतरण की योजना फरवरी 2024 में स्वीकृत हुई। नर्मदा परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का विवाद जुलाई 2026 में पूर्ण हुआ। सोन बेसिन में बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे का विवाद अगस्त 2026 में सुलझा, और आज अंततः किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना परियोजना पर सहमति बनी।

अमित शाह ने कहा कि 2018 से 2026 तक का कालखंड मोदी जी के नेतृत्व में कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक लगभग सभी जल विवादों को समाप्त करने के कालखंड के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषद की बैठकों में इनकी नींव रखी गई और इन समझौतों को जल शक्ति मंत्रालय ने कुशलतापूर्वक आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि श्री सी. आर. पाटिल ने जल शक्ति मंत्री बनने के बाद लंबे समय से लंबित विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है। उन्होंने हर स्तर पर पहल की और जहाँ जिसकी मदद की आवश्यकता पड़ी, चाहे अंतर-राज्य परिषद को सक्रिय करना हो, चाहे गृह मंत्रालय को साथ लेना हो, इस कार्य को अंजाम तक पहुँचाया।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की बात करें तो 12 मई 1994 को एक समझौता हुआ था कि बेसिन में आने वाली प्रत्येक भंडारण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते किए जाएँगे। यदि वह व्यवस्था न होती, तो यह संभव नहीं होता। फिर 2019 में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं के विवाद समाप्त होने के बाद किशाऊ का कार्य आगे बढ़ा। बीते 16 जून को इस पर औपचारिक सहमति बनी। जल शक्ति मंत्रालय ने इसे आगे बढ़ाया और सभी राज्यों की सहमति के बाद, तकनीकी एवं आर्थिक पक्षों पर विचार करते हुए तथा सभी राज्यों के हितों की चिंता करते हुए, इसे समाधान तक पहुँचाया गया।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार भारत सरकार वहन करेगी और शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 के समझौते के अनुसार भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार की कुछ कठिनाइयाँ थीं। भारत सरकार की ओर से हमने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनकी माँगों को भारत सरकार की योजनाओं के अंतर्गत समाहित करने का प्रयास किया जाएगा और आगे उत्तराखंड पर आने वाले वित्तीय भार के वहन में भी हम उनकी मदद करेंगे।

अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनेगा, जहाँ 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण होगा। इससे 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा।

गृह मंत्री ने कहा कि जब यमुना के जल का बंटवारा हुआ, तब नीति-निर्धारकों की ओर से एक गंभीर चूक हुई। यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह की गणना ही नहीं की गई और जितना जल उपलब्ध था, वह सब राज्यों के बीच बाँट दिया गया। नदी के लिए जल छोड़ा ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते से 25 प्रतिशत जल आएगा, वह दिल्ली और यमुना दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा।

अमित शाह ने कहा कि जब से  रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी हैं, मोदी जी के नेतृत्व में यमुना के शुद्धिकरण के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। यमुना जब स्वच्छ होती है, तो गंगा भी स्वच्छ होती है; क्योंकि अंततः यमुना प्रयागराज में गंगा में ही समाहित होती है। उन्होंने कहा कि जब तक यमुना की स्वच्छता का स्वप्न पूरा नहीं होता, गंगा की स्वच्छता का स्वप्न भी अधूरा रहेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री और सभी संबंधित लोग पूर्ण सहयोग एवं मनोयोग के साथ यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की सफलता मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” और टीम भारत के मूल मंत्र का उत्तम उदाहरण है। यह भारत की उस परिकल्पना को भी दर्शाती है, जिसमें सभी साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी पक्षों ने जिस प्रकार इस समझौते में एक मन से और एक दिशा में कार्य किया है, उसी प्रकार इस परियोजना को पूर्ण करने में भी सभी राज्य एक दिशा में कार्य करेंगे। इससे हम यमुना को शीघ्र स्वच्छ कर सकेंगे और करोड़ों लोगों को पेयजल, कृषि जल, विकास एवं औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा

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