Back To Top

September 26, 2026

जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन, टिकाऊ जल सेवाओं पर फोकस के साथ 9वां भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 संपन्न 

सी.आर. पाटिल ने आईआईडब्लूडब्लू 2026 में जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया

आईआईडब्लूडब्लू 2026  ने नवाचार, ज्ञान और टिकाऊ वॉश समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक जल समुदाय को एक साथ जोड़ा

भारत अंतर्राष्ट्रीय वॉश सम्मेलन में टिकाऊ जल सेवाओं के लिए समुदाय-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण, डिजिटल नवाचार और मजबूत संस्थानों पर प्रकाश डाला गया

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में समापन समारोह के साथ, 9वां भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्लूडब्लू) 2026 आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। “जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन” विषय के तहत 22-25 सितंबर तक आयोजित इन विचार-विमर्शों में जल सुरक्षा के लिए उभरती चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा करने हेतु नीति निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, विकास साझीदारों, शोधकर्ताओं, अकादमिक जगत, उद्योग, जल-क्षेत्र के विशेषज्ञों, नवप्रवर्तकों और युवा पेशेवरों को एक साथ लाया गया।

समापन सत्र में जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना,  राज भूषण चौधरी; पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना; जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव अर्चना वर्मा; राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मितल; पेयजल और स्वच्छता विभाग के एएस एवं एमडी, एनजेजेएम कमल किशोर सोन; केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष अनुपम प्रसाद; और राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी के महानिदेशक बालेश्वर ठाकुर उपस्थित रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी. आर. पाटिल ने इस बात पर जोर दिया कि आईआईडब्ल्यू 2026 ने जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन पर विचार-विमर्श करने के लिए सरकारों, विशेषज्ञों, संस्थानों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और युवाओं को एक मंच प्रदान किया है। उन्होंने तीन मुख्य बातों पर प्रकाश डाला: जल संरक्षण में लोगों की भागीदारी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को धरातल पर उतारना, तथा अंतरराष्ट्रीय और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना। वर्ष 2019 में इसकी शुरुआत के बाद से जल जीवन मिशन के प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि घर-घर नल के पानी तक बढ़ी पहुंच ने ग्रामीण समुदायों में बेहतर स्वास्थ्य, गरिमा और जीवन की गुणवत्ता में योगदान दिया है, साथ ही महिलाओं द्वारा पानी लाने में खर्च होने वाले समय और श्रम को भी कम किया है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के एक आकलन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मिशन के तहत सुरक्षित पेयजल तक बेहतर पहुंच में बच्चों की एक बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को रोकने और असुरक्षित पानी से जुड़े स्वास्थ्य के बोझ को कम करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जेजेएम के अगले चरण का ध्यान पर्याप्त, नियमित, सुरक्षित और टिकाऊ पेयजल सेवाएं सुनिश्चित करने पर होना चाहिए, जिसमें इन लाभों को बनाए रखने के केंद्र में सामुदायिक भागीदारी, स्रोत की स्थिरता और उपयुक्त तकनीक शामिल हो।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए, जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने कहा कि जल सुरक्षा का मूल अर्थ सुरक्षित और विश्वसनीय पेयजल, स्वच्छता, साफ-सुथरे परिवेश और प्रभावी अपशिष्ट जल प्रबंधन के माध्यम से जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन द्वारा लाए गए बदलाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि पेयजल सेवाएं सुरक्षित, पर्याप्त, नियमित और टिकाऊ हों। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पेयजल और स्वच्छता का समाधान एक एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से किया जाना चाहिए, जिसमें जल स्रोतों और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए ग्रेवाटर, अपशिष्ट जल और ठोस कचरे का सुरक्षित प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने इस दृष्टिकोण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में ‘ओडीएफ प्लस’ तथा ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन सहित ‘स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण’ के तहत हुई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक’ के दौरान हुई चर्चाओं से प्राप्त सीख टिकाऊ, जन-केंद्रित जल सेवाओं और ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण की दिशा में व्यावहारिक कार्रवाई में परिवर्तित होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने सिंचाई विकास, कमांड क्षेत्रों के आधुनिकीकरण, बांध पुनर्वास, भूजल प्रबंधन और रिचार्ज, नदी पुनरुद्धार, नदी जोड़ो परियोजना, बाढ़ प्रबंधन, जल विज्ञान संबंधी पूर्वानुमान, जलाशय प्रबंधन और बेहतर जल सूचना प्रणालियों के माध्यम से जलवायु-अनुकूल जल संसाधन प्रबंधन की भारत की कोशिशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल संसाधन परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और उनके प्रभावी उपयोग पर जोर दिया तथा इस बात पर बल दिया कि किए जाने वाले निवेश का परिणाम अंततः लोगों, कृषि, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मापने योग्य परिणामों के रूप में सामने आना चाहिए।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए, पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्लूएस) के सचिव अशोक के. के. मीना ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु अनुकूलता की शुरुआत जल अनुकूलता से होती है। उन्होंने हाइड्रोलॉजिकल साइकिल को एक वैश्विक साझा सार्वजनिक संपत्ति के रूप में रेखांकित किया और इसे प्रकृति की सबसे सफल जल प्रबंधन प्रणाली बताया। उन्होंने इस चक्र को बनाए रखने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जल का प्रबंधन करने की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया, जिसमें बदलते जलवायु के सामने सामुदायिक लचीलेपन को मजबूत करने के लिए पानी की हर एक बूंद के संरक्षण, पुनर्चक्रण और पुनःपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि जल कार्यक्रमों की दीर्घकालिक सफलता आईआईडब्लूडब्लू में चर्चा किए गए ज्ञान और समाधानों को धरातल पर क्रियान्वयन और मापने योग्य परिणामों में बदलने पर निर्भर करेगी।

आईआईडब्लूडब्लू 2026 की संक्षिप्त रिपोर्ट और महत्वपूर्ण सिफारिशें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल द्वारा प्रस्तुत की गईं। इस जल सप्ताह में 7,224 प्रतिनिधियों, 227 प्रदर्शकों और 119 शोध-पत्र प्रस्तुतियों ने हिस्सा लिया, जिसमें दो साझेदार देशों और 14 साझेदार राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी रही। सात विषयगत क्षेत्रों से सामने आई सिफारिशों में मजबूत और अधिक सहभागी जल शासन, उपचारित अपशिष्ट जल का सुरक्षित रीयूज, घनिष्ठ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डेटा-संचालित शासन, समुदाय-नेतृत्व वाला भूजल पुनर्भरण, डिजिटल और उभरती हुई तकनीकों का व्यापक उपयोग, बहु-खतरा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना और जलवायु अनुकूलन के लिए नदी बेसिन स्तर के दृष्टिकोण की मांग की गई। उन्होंने नवीन वित्तपोषण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए सक्षम ढांचों, बेहतर जल उपयोग दक्षता, टिकाऊ तलछट प्रबंधन, जलाशय भंडारण के संरक्षण, वैज्ञानिक एक्विफर मैपिंग, पर्यावरणीय प्रवाह और समुदाय-नेतृत्व वाले इकोसिस्टम-आधारित जल प्रबंधन पर भी जोर दिया।

आईआईडब्ल्यू 2026 का एक महत्वपूर्ण घटक दूसरा इंडिया इंटरनेशनल वॉश कॉन्फ्रेंस 2026 था, जिसका आयोजन डीडीडब्लूएस द्वारा कोलकाता स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान (एसपीएम-एनआईडब्लूएएस) के सहयोग से किया गया था।

समापन सत्र के दौरान, एनजेजेएम के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोण ने दूसरे ‘वॉश कॉन्फ्रेंस’ के परिणामों पर प्रकाश डाला, जिसमें जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर शैक्षणिक, अनुसंधान और मैदानी दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाया गया। उन्होंने बताया कि इस चार दिवसीय आयोजन के दौरान 57 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, तथा कुछ अतिरिक्त शोध-पत्र एसपीएम-निवास में भी प्रस्तुत किए गए। उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं में स्रोत की स्थिरता, संचालन और रखरखाव, जल की गुणवत्ता, जलवायु अनुकूलन, डिजिटल तकनीकों, टिकाऊ स्वच्छता और शून्य-अपशिष्ट प्रबंधन जैसी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टिकाऊ वॉश (WASH) परिणामों के लिए तकनीकी और संस्थागत हस्तक्षेपों के साथ-साथ सक्रिय सामुदायिक भागीदारी की भी आवश्यकता है, और ज्ञान के आदान-प्रदान तथा निरंतर सहयोग के लिए भारत-अफ्रीका गोलमेज सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण मंच बताया।

डीडीडब्लूएस  द्वारा आयोजित वॉश पर भारत-अफ्रीका का गोलमेज सम्मेलन में 22 अफ्रीकी देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ-साथ विकास साझीदारों और वॉश-क्षेत्र के हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस गोलमेज सम्मेलन में क्षमता निर्माण, जल-गुणवत्ता निगरानी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, समुदाय-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे और कार्यान्वयन के अनुभवों के आदान-प्रदान में सहयोग के अवसरों तलाशा गया।

युवा तकनीकी पेशेवरों की भागीदारी इस सम्मेलन की एक अन्य विशेषता थी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की साझेदारी में, 50 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों ने वॉश कॉन्फ्रेंस में भाग लिया, जिससे उभरती हुई तकनीकी प्रतिभा को जल और स्वच्छता से जुड़ी वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से जोड़ने का अवसर मिला।

समापन समारोह का एक मुख्य आकर्षण ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्लूएससी) के सदस्यों और सुजलाम शक्ति समूह के सदस्यों के लिए जल जीवन मिशन के तहत विकसित आठ क्षमता निर्माण मॉड्यूल का विमोचन था। इन मॉड्यूल को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल द्वारा जारी किया गया।

ये मॉड्यूल ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण के मुख्य पहलुओं संस्थागत भूमिकाओं और जिम्मेदारियों, स्रोत की स्थिरता और जल की गुणवत्ता, संचालन और रखरखाव, प्रौद्योगिकी, सामुदायिक भागीदारी और जलवायु अनुकूलन को समझाने के लिए वास्तविक ग्रामीण स्थितियों का उपयोग करते हैं। इन मॉड्यूल का उद्देश्य स्थानीय संस्थानों और सामुदायिक हितधारकों की जल सेवाओं का प्रबंधन करने तथा दीर्घकालिक रूप से बुनियादी ढांचे को बनाए रखने की क्षमता को मजबूत करना है।

इन मॉड्यूल का विमोचन ऐसे समय में हुआ है जब जल जीवन मिशन देश भर में ग्रामीण पेयजल बुनियादी ढांचे के महत्वपूर्ण विस्तार को आगे बढ़ाते हुए, आश्वस्त, विश्वसनीय और टिकाऊ सेवा वितरण पर अधिक जोर देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

समापन सत्र में भारत की उभरती जल चुनौतियों का समाधान करने में सरकारों, समुदायों, वैज्ञानिक संस्थानों, विकास साझेदारों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग के महत्व को दोहराया गया। आईआईडब्ल्यू 2026  की चर्चाओं ने भारत के जल-सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए साक्ष्य-आधारित योजना, तकनीकी नवाचार, संस्थागत सुदृढ़ीकरण, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता को पुष्ट किया।

नौवें ‘इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक’ का समापन चार दिवसीय मंच से सामने आए ज्ञान, साझेदारियों और समाधानों को आगे बढ़ाने तथा जल सुरक्षा, टिकाऊ सेवाओं और जलवायु-अनुकूल समुदायों की दिशा में सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

समापन समारोह के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रकाशन, रिपोर्ट, प्रोटोकॉल और क्षमता निर्माण मॉड्यूल जारी किए गए। इनमें टिकाऊ और कुशल सिंचाई में उभरते रुझानों और प्रगति पर नेरीवाल्म  की दो पुस्तकें, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा नदी संबंधी मैक्रोप्लास्टिक्स निगरानी के लिए प्रोटोकॉल, जल जीवन मिशन के तहत क्षमता निर्माण मॉड्यूल, बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की पहली जनगणना, 7वीं लघु सिंचाई जनगणना, जल निकायों की दूसरी जनगणना और झरनों की पहली जनगणना पर रिपोर्ट शामिल थीं। केंद्रीय जल आयोग द्वारा विकसित सिंचाई एटलस का ई-लोकार्पण भी किया गया। आईआईडब्ल्यू 2026 प्रदर्शनी के विभिन्न श्रेणियों के तहत पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

दिन में इससे पहले, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और मजबूत जल शासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए आईआईडब्ल्यू 2026 के हिस्से के रूप में 3 सत्र आयोजित किए गए। इन वार्ताओं के केंद्र में पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्लूएस) द्वारा आयोजित तीन सत्र थे: “जल क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा”, “जल गुणवत्ता और लागत प्रभावी प्रौद्योगिकी”, और “ग्रामीण जल आपूर्ति शासन और कार्यान्वयन ढांचा”। इन सत्रों ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जल-गुणवत्ता प्रबंधन, उभरती प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान, शासन और ग्रामीण जल सेवाओं को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर विविध दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

“जल क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा” पर आयोजित सत्र में अंतर-संचालनीय डेटा, एआई, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और नागरिक-केंद्रित मंच जल शासन तथा सेवा वितरण को कैसे बदल सकते हैं, यह तलाशने के लिए वरिष्ठ सरकारी, अंतरराष्ट्रीय और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया। एनजेजेएम के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक कमल किशोर सोण की अध्यक्षता में और विश्व बैंक के श्री विलियम रेक्स की सह-अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में “वन डेटा के रूप में जल” के दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया, जिसमें सुजलाम भारत को ग्रामीण पेयजल के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में स्थान दिया गया। चर्चाओं में विश्वसनीय और प्रमाणीकृत डेटासेट, भू-स्थानिक परिसंपत्ति मैपिंग, नागरिक प्रतिक्रिया, जल सेवा एनालिटिक्स, ग्रामीण डेटा स्टैक और आधार, डिजीलॉकर तथा यूपीआई जैसे बुनियादी प्लेटफार्मों से लेकर रिसाव का पता लगाने, पूर्वानुमानित रखरखाव और परिसंपत्ति प्रबंधन का समर्थन करने वाले अनुप्रयोगों तक क्षेत्रीय डीपीआई के विकास को शामिल किया गया।

अपनी शुरुआती टिप्पणी में, कमल किशोर सोण ने इस बात पर प्रकाश डाला कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे  को बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में तेजी से मान्यता दी जा रही है। आधार और यूपीआई के साथ भारत के अनुभव का हवाला देते हुए, उन्होंने उल्लेख किया कि सामान्य डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रणालियों को जोड़ सकते हैं, नवाचार का समर्थन कर सकते हैं और लाखों नागरिकों को सेवाओं की डिलीवरी को सुगम बना सकते हैं। उन्होंने देखा कि जल क्षेत्र एक अनूठी चुनौती पेश करता है क्योंकि जल सेवाएं स्रोतों, बुनियादी ढांचे, संस्थानों, भूगोल और समुदायों से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं। चूंकि जल जीवन मिशन तेजी से टिकाऊ जल सेवाओं, बेहतर शासन और सूझबूझ भरे निर्णयों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, इसलिए इन आयामों में डेटा को जोड़ने और उपयोग करने की क्षमता का महत्व और बढ़ जाता है।

“वन डेटा के रूप में जल” के व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए, श्री सोण ने कहा कि एकीकृत डेटा योजना, प्रबंधन और सेवा वितरण को मजबूत कर सकता है। इस दृष्टिकोण के तहत, सुजलाम भारत को ग्रामीण पेयजल के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसका महत्व केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को डिजिटाइज़ करने में नहीं है, बल्कि एक ऐसा सामान्य डिजिटल आधार तैयार करने में है जिस पर भविष्य के अनुप्रयोग, विश्लेषणात्मक प्रणालियाँ और निर्णय-समर्थन क्षमताएँ विकसित की जा सकें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डीपीआई का वास्तविक मूल्य उत्पन्न डेटा की मात्रा से तय नहीं होगा, बल्कि संस्थानों को बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाने और अंततः नागरिकों के लिए परिणामों में सुधार करने की इसकी क्षमता से तय होगा।

पेयजल क्षेत्र को बदलने में डीपीआई की भूमिका पर बोलते हुए, सुश्री स्वाति मीणा नायक ने खंडित डेटासेट से आगे बढ़ने और एक एकीकृत, विश्वसनीय और अंतर-संचालनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि पेयजल क्षेत्र पहले से ही आईओटी  उपकरणों, स्काडा प्रणालियों, मैदानी स्तर की रिपोर्टिंग और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से लाखों डेटा पॉइंट उत्पन्न करता है। चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ये डेटासेट अंतर-संचालनीय, प्रमाणित, सुसंगत और शासन तथा नीतिगत निर्णयों का समर्थन करने में सक्षम हों।

सत्र में इस बात पर भी चर्चा की गई कि कैसे डिजिटल बुनियादी ढांचा अधिक उत्तरदायी, सक्रिय और नागरिक-केंद्रित जल सेवाएं सक्षम कर सकता है। सुश्री सुनीता जैन ने जल-सेवा की जानकारी प्राप्त करने और जियो-टैग किए गए साक्ष्यों के माध्यम से समस्याओं की रिपोर्टिंग के लिए ‘मेरी पंचायत’ पर प्रकाश डाला, जबकि श्री जीन मार्टिन ने स्काडा और स्वचालन से आगे बढ़कर जीआईएस, स्मार्ट मीटरिंग, एआई और डिजिटल ट्विन्स तक पहुंचने के सिंगापुर के अनुभव को साझा किया। सत्र का समापन गूगल के ग्लोबल फ्लड हब के प्रदर्शन के साथ हुआ, जिसमें एआई-सक्षम नदी और शहरी फ्लैश-फ्लड के पूर्वानुमान को प्रदर्शित किया गया। चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि डीपीआई का मूल्य केवल डेटा उत्पन्न करने में नहीं है, बल्कि प्रणालियों में विश्वसनीय जानकारी को जोड़ने और इसे बेहतर निर्णयों, सक्रिय प्रबंधन तथा नागरिकों के लिए बेहतर सेवाओं में बदलने में है।

डीडीडब्लूएस का दूसरा सत्र, “जल गुणवत्ता और लागत प्रभावी प्रौद्योगिकी”, जल गुणवत्ता, पारिस्थितिक पुनरुद्धार, जलवायु अनुकूलन, भूजल मूल्यांकन और जल-क्षेत्र के उपकरणों में नवाचारों का पता लगाने वाले शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को एक साथ लाया। श्री अभिलाष तिवारी ने माइक्रोहैल्गी-आधारित फाइटोरेमेडिएशन पायलट प्रस्तुत किया, जिसमें कार्बन पृथक्करण और कम परिचालन लागत के साथ-साथ डीओ, बीओडी, सीओडी, पीएच, जैव विविधता और गंध में सुधार दर्ज किया गया। श्री सुरेश शर्मा ने विभिन्न मिट्टी, बायोचार और खाद विन्यासों में वर्षा जल के बढ़े हुए संचयन और कम शिखर अपवाह को प्रदर्शित करते हुए व्यापक हरित छतों पर शोध प्रस्तुत किया। सत्र में माइक्रोप्लास्टिक्स को जल-गुणवत्ता संबंधी एक उभरती हुई चिंता के रूप में भी रेखांकित किया गया, जिसमें श्री श्रीनिवास बिलाकंटी ने मजबूत नमूनाकरण, विश्लेषणात्मक और निगरानी प्रोटोकॉल की मांग की।

बीरेंद्र प्रताप ने पारंपरिक नमूनाकरण के कठिन होने की स्थिति में ईसी, टीडीएस और क्लोराइड जैसे बुनियादी भूजल-गुणवत्ता मापदंडों का आकलन करने के लिए एक लागत प्रभावी दृष्टिकोण के रूप में बोरहोल भूभौतिकीय विद्युत लॉगिंग प्रस्तुत की। डॉ. मोहम्मद फैसल रहमान ने पर्यावरणीय तनाव के संपर्क में आने वाले जल-संसाधन उपकरणों को सत्यापित करने में सीडब्लूपीआरएस, पुणे में आईपी परीक्षण की भूमिका पर प्रकाश डाला। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे वैज्ञानिक नवाचार, उचित निगरानी और मजबूत उपकरण जल-गुणवत्ता मूल्यांकन को मजबूत कर सकते हैं, जल-क्षेत्र प्रणालियों की विश्वसनीयता में सुधार कर सकते हैं और अधिक टिकाऊ संसाधन प्रबंधन का समर्थन कर सकते हैं।

“ग्रामीण जल आपूर्ति शासन और कार्यान्वयन ढांचा” पर सत्र ने जल जीवन मिशन के तहत तेजी से बुनियादी ढांचा तैयार करने से लेकर विश्वसनीय, टिकाऊ और जवाबदेह जल-सेवा वितरण की ओर बदलाव का परीक्षण किया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्लूएस) के सचिव श्री अशोक के. के. मीना ने इस बात पर जोर दिया कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल बुनियादी ढांचे के पर्याप्त विस्तार के साथ, अब ध्यान परिसंपत्ति निर्माण से हटकर आश्वस्त, विश्वसनीय और टिकाऊ सेवा वितरण पर केंद्रित हो रहा है। उन्होंने उपयुक्त सेवा प्रदाताओं और मजबूत ओ एंड एम व्यवस्थाओं द्वारा समर्थित, स्थानीय जल-सेवा संस्थानों के रूप में ग्राम पंचायतों को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, ताकि ग्रामीण परिवारों को लगातार सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल मिल सके। सामुदायिक-नेतृत्व वाले सेवा मूल्यांकन के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने उल्लेख किया कि ‘जल सेवा आकलन’ जैसी पहल ग्राम पंचायतों को सहभागी प्रक्रियाओं के माध्यम से सेवा स्तरों का मूल्यांकन करने, कमियों की पहचान करने और सुधार योजनाएं तैयार करने में सक्षम बना रही हैं। उन्होंने ग्रामीण जल सेवाओं को पेशेवर बनाने, स्रोत की स्थिरता और जलवायु अनुकूलन उपायों को मजबूत करने, निगरानी और जवाबदेही के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाने, तथा निरंतर क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जेजेएम की अंतिम सफलता तेजी से पेयजल सेवाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और स्थिरता तथा स्थानीय संस्थानों और समुदायों की समय के साथ उनका प्रबंधन और सुधार करने की क्षमता से आंकी जानी चाहिए।

वक्ताओं ने स्पष्ट संस्थागत जिम्मेदारियों, वित्तपोषण तंत्र, सेवा प्रदाताओं और क्षमता निर्माण द्वारा समर्थित, संचालन और रखरखाव में ग्राम पंचायतों और पानी समितियों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। चर्चाओं में भूजल स्थिरता और स्रोत संरक्षण, जलवायु–अनुकूल योजना, मौसमी मांग और स्थानीय रूप से उपयुक्त आपूर्ति मॉडल की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। योजनाओं को बनाए रखने के लिए सामुदायिक स्वामित्व, पारदर्शी टैरिफ प्रणालियों, पेशेवर सेवाओं और डिजिटल उपकरणों के महत्व को प्रदर्शित करने वाले गुजरात और बिहार के अनुभवों के साथ–साथ, मध्य प्रदेश के 2026 के ओ एंड एम नियमों को ग्राम पंचायत की जिम्मेदारियों, वित्तीय शक्तियों और संस्थागत संरचनाओं को स्पष्ट करने के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

Prev Post

Climate Resilience, Water Finance and Innovation in Focus on Day…

Next Post

DDA holds consultation on MPD-2047 focusing on River Yamuna, Green-Blue…

post-bars
Mail Icon

Newsletter

Get Every Weekly Update & Insights


Warning: Undefined variable $mailchimp_shortcode in /home/u475726453/domains/jalprahari.com/public_html/wp-content/themes/binduz/template-parts/blog/post-parts/part-mailchimp.php on line 35
[mc4wp_form id=]

Leave a Comment

Write Your Blog Post