गजेंद्र सिंह शेखावत ने युगल जोशी द्वारा लिखे गए उपन्यास कहो कालिदास..का किया विमोचन
नई दिल्ली । केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रेलवे सुरक्षा बल के नीति आयोग में नियुक्त अधिकारी व लेखक युगल जोशी द्वारा लिखे गए उपन्यास कहो कालिदास..का विमोचन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सभागार में किया। इस अवसर पर केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, नीति आयोग के सदस्य डॉ. जोराम आनिया सहित कई अधिकारी, लेखक, कलाकार, पत्रकार एवं छात्र उपस्थिति रहे।
उपन्यासकार युगल जोशी के शब्दों में कहो कालिदास!, महाकवि की कृतियों के आलोक-आभास में, कवि-व्यक्तित्व की तराश, उनकी प्रेरणाओं की एक कल्पना-प्रधान कथा है। इस कथा में उनकी अद्भुत रचनाओं से झाँकते कवि के ह्रदय-मन की अनुभूतियों-अनुभवों, अनुराग-विराग की छवि-सूत्रों का ताना-बाना बुनने का प्रयास किया गया है। पांच अद्भुत प्रेम-कथाओं में गुँथी, तत्कालीन भारतीय समाज और राजनीति की पृष्ठभूमि में पल्लवित, महाकवि की सात कालजयी और मर्मस्पर्शी रचनाएं पाठकों को रति-भाव के उल्लास, और विरह, प्रतीक्षा एवं स्मृति की मार्मिकता में डुबो देगी।
युगल जोशी ने बताया कि बचपन में कैसे उन्हें एक सजा के बाद शिक्षक से जो किताब मिली वह महाकवि कालिदास की लिखी हुई थी लेकिन तब वह समझ नहीं आई और आज उस महान साहित्यकार, महाकवि के कृतित्व से ख़ुद की रचना से जुड़ना बहुत बड़ा सौभाग्य ज़रूर है ।
इस अवसर पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि महाकवि कालिदास के जीवन और व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द व्याप्त मौन को वाणी देने का एक प्रयास है। इसमें कोई संदेह नहीं कि कालिदास विश्व के महानतम कवियों में से एक हैं, फिर भी उनके जीवन और व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ अज्ञात बना हुआ है। कहो कालिदास! लेखक की रचनात्मक व्याख्या के माध्यम से कालिदास और उनकी दुनिया को आवाज़ और अभिव्यक्ति प्रदान करने का प्रयास करता है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि कालिदास का साहित्य युवाओं के लिए आज भी गहन रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि यह मानवीय इच्छाओं, संबंधों, समाज और सत्ता जैसे सनातन प्रश्नों से जुड़ता है। हालाँकि कवि के जीवन, मानसिकता और उनके द्वारा झेली गई परिस्थितियों के बारे में बहुत कुछ अज्ञात है, फिर भी उनकी रचनाएँ मानव जीवन और समाज के बारे में कालातीत दृष्टि प्रदान करती रहती हैं।













