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July 30, 2026

महानदी जल विवाद समाधान की ओर, छत्तीसगढ, ओडिशा के सीएम के साथ जलशक्ति मंत्री ने की बैठक

केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने आज महानदी जल विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने हेतु छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जलशक्ति मंत्रालय, केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और दोनों राज्यों की सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

यह बैठक बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के जरिए महानदी जल विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के भारत सरकार के जारी प्रयासों की दिशा में एक अहम कदम है। पिछले कई वर्षों के दौरान, महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर अलग-अलग स्तरों पर व्यापक विचार-विमर्श और प्रयास किए गए हैं। ओडिशा राज्य सरकार के अनुरोध पर, भारत सरकार ने ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956’ के तहत 12 मार्च 2018 को ‘महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण’ (एमडब्ल्यूडीटी) का गठन किया। केन्द्र सरकार ने न्यायाधिकरण का कार्यकाल भी बढ़ाया ताकि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

हाल ही में, इस प्रक्रिया ने और गति पकड़ी है क्योंकि दोनों राज्यों ने आपसी सहयोग और तकनीकी बातचीत के जरिए सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने की इच्छा दर्शायी है।

बैठक में संयुक्त तकनीकी समिति की प्रगति पर भी गौर किया गया। इस समिति ने कई बैठकें की हैं और विभिन्न तकनीकी मुद्दों पर आम सहमति बनाई है। बैठक में केन्द्रीय जल आयोग के चेयरमैन की अध्यक्षता में बनी विस्तारित तकनीकी समिति के गठन का भी संज्ञान लिया गया। इस समिति में छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकारों के प्रतिनिधि शामिल हैं तथा शेष तकनीकी बातचीत को आगे बढ़ाने हेतु इसकी पहली बैठक 29 जुलाई 2026 को हुई।

दोनों मुख्यमंत्रियों का स्वागत करते हुए, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री  सी. आर. पाटिल ने कहा कि महानदी दोनों राज्यों के लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है। उन्होंने इस बात पर जोर  दिया कि बातचीत, तकनीकी सहयोग और आपसी भरोसा ही एक निष्पक्ष, टिकाऊ और सभी को स्वीकार्य समाधान पाने के सबसे कारगर साधन हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने लंबे समय से चले आ रहे पानी से जुड़े विवादों को सुलझाने हेतु राज्यों को एक साथ लाने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। केन्द्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यमुना जल परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले को कार्यान्वित करने से जुड़े मुद्दों का समाधान और संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (एमपीकेसी) लिंक परियोजना पर आम सहमति सहित हाल की विभिन्न उपलब्धियां यह तथ्य को रेखांकित करती हैं कि निरंतर बातचीत, सहकारी संघवाद और आम सहमति से लिए गए फैसलों के जरिए राज्यों के बीच पानी से जुड़े सबसे जटिल विवादों को भी सुलझाया जा सकता है।

दोनों मुख्यमंत्रियों ने रचनात्मक भावना के साथ जारी तकनीकी बातचीत को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया और जलशक्ति मंत्रालय तथा केन्द्रीय जल आयोग द्वारा दी गई सहायता की सराहना की। बैठक का समापन करते हुए, सी. आर. पाटिल ने इस बात को दोहराया कि लक्ष्य सिर्फ मौजूदा विवाद को ही सुलझाना नहीं, बल्कि महानदी बेसिन के प्रबंधन हेतु एक दीर्घकालिक, निष्पक्ष और टिकाऊ ढांचा तैयार करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों राज्यों के बीच लगातार रचनात्मक बातचीत से आपसी सहमति वाला और स्थायी समाधान निकल सकेगा।

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